वैशाखी 2021 जाने महत्व, मान्यताएं और तारीख

 वैशाखी का त्यौहार हर साल अप्रैल महीने में मनाया जाता है।यह त्यौहार किसानों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है इसलिए इसे कृषि पर्व भी कहते हैं। विशेष रूप से पंजाब और हरियाणा में यह त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन पंजाब और हरियाणा के किसान अपनी फसल की कटाई कर लेते हैं और शाम के समय आग जलाकर उसके चारों और एकत्र होते हैं बाद में अन्न डालते हैं । देश के कई हिस्सों में वैशाखी से ही फसलों की कटाई शुरू होती है। इस वर्ष वैशाखी का पर्व 14 अप्रैल के दिन बुधवार को मनाया जाएगा। 

पंजाब, हरियाणा और उत्तर भारत के कई स्थानों पर वैशाखी धूमधाम से मनाई जाती है इसे सिखों के नव वर्ष के रूप में भी मनाया जाता है । 

 वैशाखी का महत्व

  • सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह जी ने 13 अप्रैल 1699 को वैशाखी के दिन ही खालसा पंथ की स्थापना की थी। इसीलिए सिखों के लिए बैसाखी का त्यौहार महत्वपूर्ण है। 
  • पंजाब और हरियाणा के किसान अपनी फसल इस दिन काट लेते हैं और वैशाखी की शुभकामनाएं एक दूसरे को देते हैं। यहां पर नए कपड़े पहने जाते हैं और उत्सव मनाया जाता है। शाम को आग जलाकर उसके चारों पर खड़े होते हैं और भांगड़ा और गिद्दा भी करते हैं। 
  • वैशाखी को मेष संक्रांति भी कहा जाता है। इस दिन सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करते हैं। मेष राशि में प्रवेश करने से सूर्य का 12 राशि पर अच्छा या बुरा प्रभाव भी पड़ता है। 
  • बंगाल में भी वैशाखी का अपना ही महत्व है,क्योंकि वैशाखी बंगाली कैलेंडर का पहला दिन माना जाता है। इस दिन लोग उत्सव मनाते हैं और मांगलिक कार्य भी करते हैं। 
  • असम में वैशाखी के दिन बिहू पर्व का उत्सव मनाया जाता है।
  •  वैशाखी के दिन नव संवत् की शुरुआत भी होती है। चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को नया संवत् प्रारंभ होता है। इसे हिंदू नव वर्ष का पहला दिन भी कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। 

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