Narasimha Jayanti

नरसिम्हा जयंती 2021: नरसिंह जयंती विशाख माह के शुक्ल पक्ष के 14वें दिन मनाई जाती है। नरसिंहा जी को भगवान विष्णु का चौथा अवतार कहा जाता है। जिनका चेहरा शेर जैसा और शरीर आदमी की तरह है। उन्होंने अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए राक्षस हिरण्यकश्यप का वध किया था। इन्हें शक्ति और पराक्रम के देवता माना जाता है। नरसिंह जयंती पर मंदिर में इनकी पूजा की जाती है। नरसिंह जयंती मनाने का उद्देश्य ही है लोगों को धर्म के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करना। भारत खासतौर से दक्षिणी भारत में इनकी विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है। लोग मानते हैं कि नरसिम्हा भगवान भक्तों की हर विपत्ति को हर लेते हैं।

पूजा-पाठ के साथ ही लोग इस दिन एक-दूसरे को मैसेज भेजकर भी इस दिन की खुशियां मनाते हैं।   भगवान नरसिंह में अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा करने हेतु नरसिंह भगवान का रूप धारण किया था यह भगवान विष्णु के ही अवतार है भगवान नरसिंह का आधा स्वरूप सिंह का तो आधा स्वरूप मानव का है इसलिए इन्हें नरसिंह कहा जाता है नरसिंह भगवान की पूजा करने वाले भक्तों का कहना है कि जिस तरह नरसिंह भगवान ने प्रहलाद की रक्षा के लिए हिरण्यकश्यप का वध किया था वह अपने भक्तों की रक्षा हेतु सदैव तत्पर रहते हैं और उस समय आने पर उनकी रक्षा भी करते हैं दक्षिण भारत में नरसिंह भगवान की जयंती को धूमधाम से मनाया जाता है वह पूजा अर्चना की जाती है।

Narasimha Jayanti Date, Time, Puja

नरसिंह जयंती के दिन शाम को पूजा के लिए 2 hr 38 min का समय प्राप्त हो रहा है। आप 25th May को शाम 4 बजकर 32 Min से शाम 7 बजकर 38 Min के मध्य तक भगवान Narasimha की पूजा कर सकते है। शाम की पूजा का समय इसलिए है क्योंकि भगवान विष्णु ने असुर राज हिरण्यकश्यप का वध करने के लिए दिन के ढलने और शाम के प्रारंभ के मध्य का समय चुना था। इस समय काल में ही उन्होंने Narasimha अवतार लिया था।

Narasimha Jayanti Importance/Significance

असुर राज हिरण्यकश्यप स्वयं को भगवान मानता था और अपनी प्रजा को स्वयं की पूजा करने के लिए प्रताड़ित करता था। उसका पुत्र प्रह्लाद विष्णु भक्त था। उसने कई यातनाएं झेलने के बाद भी भगवान विष्णु की आराधना नहीं छोड़ी। हिरण्यकश्यप को वरदान प्राप्त था कि उसे न तो मनुष्य और न ही पशु मार सकता है, न ही घर के अंदर और न ही घर के बाहर उसका मारा जा सकता है। न ही दिन में और न ही रात में उसका वध हो सकता है। न ही अस्त्र से मरेगा और न ही शस्त्र से। न ही आकाश में और न ही धरती पर उसको मारा जा सकता है।

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