"कहानी"

सुनो सुनाने वाली हूँ मैं तुमको एक कहानी, जुड़ी है जिससे माटी,नदी का कल-कल करता पानी,

हर पत्थर मे मिल जाती जहाँ वीरों की है निशानी, चलो सुनाती हुँ मै तुमको ऐसी एक कहानी,

देश था मेरा हरा-भरा इक सोने की चिर्रैया, सपनो जैसी लगती थी जहाँ रात और दोपहरीया,

वीरो ने जहाँ जनम लिया,किया धन्य हमारी माटी को, प्राण किये है न्यौछावर,दिये शीश है भारत माता को,

सुनो सुनाती हुँ मैं तुमको ऐसी एक कहानी ...
जुड़ी है जिससे माटी नदी का कल-कल करता पानी,

पृथवी और महाराणा ने किया जहाँ था राज और वहीं कहां शत्राणी आने वाली थी बाज़,

राजा ने जहाँ शत्रु को दौड़ा-दौड़ा कर मारा था,
वहीं महारानी ने तो काली रूप ही धर डाला था,

भगत,गुरु और लाला थे जिस देश के रखवाले और जहाँ गाँधी सुभाष ने प्राण ही दे डाले,  सिर कटाये

जिन महापुरुषो ने भारत माता की आन मे,वहीं किया जौहर महारानी ने अपने आत्म सम्मान मे,

कण - कण रंगा है जिनके लहू से,ऐसे देश को मैं गाती हुँ,आज मैं तुम्हे अपने भारत की गाथा को  सुनाती हुँ,

किया अंग्रेजों ने जो प्रहार भारत माता की आन पे,था मिटा दिया नामो निशान वीरो ने अपने बलिदान से,

73वी है 'स्वतंत्रता',71वा जो 'गणतंत्र' है,
73वी है 'स्वतंत्रता',71वा जो 'गणतंत्र' है,

होने देना बर्बाद इसे ना,वीरों का इसमे रक्त है, करुगी अब मैं अंत कहानी जो असीमित अनंत है,

आज़ादी का पास मेरे बस यही इकलोता  मंत्र है,रहना है होकर एक हमें ,तू सुन ले ए दोस्त मेरे,

कहना है होकर एक हमे,भारत माता की जय भारत माता की जय ....'$'

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