sharad_purnima

शरद पूर्णिमा का त्यौहार अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाता है । धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन कोजागिरी लक्ष्मी पूजा होती है और रात में वह अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होकर अमृत की वर्षा करते हैं।

शरद पूर्णिमा को को मोदी यानी मूनलाइट या कोजागिरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है । इस पर्व पर चंद्रमा की रोशनी के नीचे खीर को रखा जाता है शरद पूर्णिमा का भी एक अपना ही महत्व है।

कोजगरा पूजन की विधि

आज कुछ घर लक्ष्मी पूजन की जाती है शाम के समय लक्ष्मी पूजन का सर्वोत्तम समय है कोजगरा पूजन में गंगाजल,. तिल , जौ, अक्षत,  चंदन , रक्त चंदन,  रोली मोली,  बिल्वपत्र आदि से पूजन करके भक्तो द्वारा माता को प्रसन्न किया जाता है।  और भक्तों की इस भक्ति से माता प्रसन्न होकर माता अपनी कृपा बरसाती है।

शरद पूर्णिमा की रात को क्यों रखी जाती है चांद की रोशनी में खीर,क्या है उसका महत्व??

शरद पूर्णिमा का दिन बेहद खास है ऐसा कहा जाता है कि आज की रात चंद्रमा की किरणें अमृत छोड़ती है इसलिए हिंदू मान्यता के अनुसार आज के दिन रात के समय सिर को चंद्रमा की रोशनी में रख दिया जाता है । और ऐसा रखा जाना खास माना जाता है और उसका खास महत्व है।

पूर्णिमा की खीर को चांदी के बर्तन में रखना ज्यादा उत्तम रहता है चांदी का बर्तन होने पर उसे किसी अन्य पात्र में भी रख सकते हैं।

शरद पूर्णिमा का पूजन का शुभ मुहूर्त

शरद पूर्णिमा आज 30 अक्टूबर को है आज शरद पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त 5ः 45 से अगले दिन 31 अक्टूबर 8:18 तक ररहेगा...

Comments

comments